विश्व योगासन चैम्पियनशिप 2026 में भारत का दबदबा

हरिद्वार, जून 2026।

प्रथम विश्व योगासन चैम्पियनशिप 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए विश्व पटल पर भारत की योग परंपरा का परचम लहराया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय महिला टीम की कप्तान एवं पतंजलि विश्वविद्यालय की योग विशेषज्ञ डॉ. आरती पाल ने स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया।

योग विषय में पीएचडी धारक तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक उपलब्धियाँ अर्जित कर चुकी डॉ. आरती पाल ने अपने अनुभव, अनुशासन और उत्कृष्ट तकनीकी प्रदर्शन से भारतीय दल का सफल नेतृत्व किया। उनकी यह उपलब्धि योगासन को वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक खेल के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रेरणा मानी जा रही है।

4 से 8 जून 2026 तक अहमदाबाद में आयोजित इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में 79 देशों के 522 खिलाड़ियों ने भाग लिया। योगासन के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर विश्व चैम्पियनशिप का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य योगासन को वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक खेल के रूप में स्थापित करना तथा भविष्य में इसे ओलंपिक मान्यता दिलाने की दिशा में आगे बढ़ाना है।

भारतीय खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में कुल 114 पदक, जिनमें 102 स्वर्ण पदक शामिल हैं, जीतकर पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। यह सफलता विश्व स्तर पर योगासन की बढ़ती स्वीकार्यता और भारत की अग्रणी भूमिका को दर्शाती है।

पतंजलि विश्वविद्यालय की प्रतिभाशाली छात्रा इंदुमथुरिया ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रिदमिक पेयर स्पर्धा में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता। इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रतियोगिता में कुल दो स्वर्ण पदक अर्जित कर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया और विश्वविद्यालय तथा देश का नाम रोशन किया।

विशेष उल्लेखनीय है कि डॉ. आरती पाल ने भारतीय महिला टीम की कप्तान के रूप में नेतृत्व करने के साथ-साथ सीनियर-ए वर्ग की ट्रेडिशनल एवं फॉरवर्ड बेंड स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। वे इससे पूर्व छह से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं तथा प्रत्येक प्रतियोगिता में पदक अर्जित किया है। एशियन योगासन स्पोर्ट्स चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक सहित 26 से अधिक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनकी उपलब्धियाँ उन्हें देश की अग्रणी योगासन खिलाड़ियों में स्थापित करती हैं।

डॉ. आरती पाल भारत की पहली योगासन खिलाड़ी हैं जिन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार के लिए अनुशंसित किया गया है। एक शिक्षाविद्, शोधकर्ता और खिलाड़ी के रूप में उन्होंने योगासन को मुख्यधारा के प्रतिस्पर्धात्मक खेल के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान में वे पतंजलि विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग में सहायक प्राध्यापक एवं समन्वयक के रूप में कार्यरत हैं।

पतंजलि विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि विश्वविद्यालय योग शिक्षा, अनुसंधान और खेल उत्कृष्टता का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है। विश्व योगासन चैम्पियनशिप 2026 में खिलाड़ियों की सफलता ने संस्थान की अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत किया है तथा भारत को योगासन की वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।